VK

Vipulbhai Karmanbhai ChaudharyAIR 115· 2025

Question 8GS2GS2

भारत की बुनियादी शिक्षा प्रणाली में रटकर सीखने की प्रवृत्ति और रचनात्मकता की उपेक्षा, इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा संचालित हो रहे बाजारों के लिए तैयार नहीं करती है। क्या आप इस मत से सहमत हैं? अपने तर्क की उत्तर की पुष्टि कीजिए। (उत्तर 150 शब्दों में दीजिए)

Open scan (p.20)

Main Body

5Economic survey 22 highlighted 60% of Indian engineers are not matching market demand.
6neglecting vocational training at school level
7Industrial Revolution 4.0 and AI drives period demand for continuing skilling → but only 5% population skilled in India
8Less great scientist/mathematician or academician → produced in India long → Hardly few noble laureates.

Future shifting:

1Innovation driven culture (ex) ATL / atal innovation unit
2Critical thinking and ductility
3Introduce experiential learning
4Measure skilling, assessing and updating curriculum

— Vipulbhai Karmanbhai Chaudhary · AIR 115

85 words2 paragraphs
This is a continuation from previous page
Steal this copy's techniques PremiumAI pulls out the reusable moves — pick the ones you want as flashcards
Compare my answer PremiumSee where this topper beats you

Topper

Vipulbhai Karmanbhai Chaudhary

AIR 1152025

Subject & Paper

GS2GS2

Topic

Education

Development and Management of Education Services

NEP and Skill Development

Writing Stats

85

Total words

2

Paragraphs

analytical

Tone

Linked PYQ

5. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए और उसका भाव-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए । (प्रत्येक लगभग 150 शब्दों में) 10x5=50 5.(a) इस गतिशील जगत् में परिवर्तन पर आश्चर्य ! परिवर्तन रुका कि महापरिवर्तन — प्रलय हुआ ! परिवर्तन ही सृष्टि है, जीवन है । स्थिर होना मृत्यु है, निश्चेष्ट शांति मरण है । प्रकृति क्रियाशील है । समय पुरुष और स्त्री की गेंद लेकर दोनों हाथ से खेलता है । 10 5.(b) राजनीति साहित्य नहीं है । उसमें एक एक क्षण का महत्व है । कभी एक क्षण भी स्खलित हो जाए, तो बड़ा अनिष्ट हो सकता है । राजनीतिक जीवन की धुरी में बने रहने के लिए व्यक्ति को बहुत जागरूक रहना पड़ता है । 10 5.(c) यदि प्रेम स्वप्न है, तो श्रद्धा जागरण है । प्रेम प्रिय को अपने लिए और अपने को प्रिय के लिए संसार से अलग करना चाहता है । प्रेम में केवल दो पक्ष होते हैं और श्रद्धा में तीन । प्रेम में कोई मध्यस्थ नहीं पर श्रद्धा में मध्यस्थ अपेक्षित है । 10 5.(d) मैं प्रेम को संदेह से ऊपर समझती हूँ । वह देह की वस्तु नहीं, आत्मा की वस्तु है । संदेह का वहाँ ज़रा भी स्थान नहीं और हिंसा तो संदेह का ही परिणाम है । वह संपूर्ण आत्म-समर्पण है । उसके मंदिर में तुम परीक्षक बनकर नहीं, उपासक बनकर ही वरदान पा सकते हो । 10 5.(e) और यह राजधानी ! जहाँ सब अपना है, अपने देश का है ..... पर कुछ भी अपना नहीं है, अपने देश का नहीं है । तमाम सड़कें हैं, जिन पर वह जा सकता है, लेकिन वे सड़कें कहीं नहीं पहुँचाती । उन सड़कों के किनारे घर हैं, बस्तियाँ हैं पर किसी भी घर में वह नहीं जा सकता । 10

50M2020प्रतिपादित कीजिए